महाभारत 1.210.7
ततोऽर्जुनो यथावृत्तं सर्वमाख्यातवांस्तदाश्रुत्वोवाच च वार्ष्णेय एवमेतदिति प्रभुः
tato'rjuno yathāvṛttaṃ sarvamākhyātavāṃstadāśrutvovāca ca vārṣṇeya evametaditi prabhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें