महाभारत 1.217.12
ते शराचितसर्वाङ्गा विनदन्तो महारवान्ऊर्ध्वमुत्पत्य वेगेन निपेतुः पावके पुनः
te śarācitasarvāṅgā vinadanto mahāravānūrdhvamutpatya vegena nipetuḥ pāvake punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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