महाभारत 1.219.26
शतेनैकं च विव्याध शतं चैकेन पत्रिणाव्यसवस्तेऽपतन्नग्नौ साक्षात्कालहता इव
śatenaikaṃ ca vivyādha śataṃ caikena patriṇāvyasavaste'patannagnau sākṣātkālahatā iva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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