महाभारत 1.219.37
स चक्रमुद्यतं दृष्ट्वा दिधक्षुं च हुताशनम्अभिधावार्जुनेत्येवं मयश्चुक्रोश भारत
sa cakramudyataṃ dṛṣṭvā didhakṣuṃ ca hutāśanamabhidhāvārjunetyevaṃ mayaścukrośa bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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