महाभारत 1.221.6
न च त्यक्तुमहं शक्ता हृदयं दूयतीव मेकं नु जह्यामहं पुत्रं कमादाय व्रजाम्यहम्
na ca tyaktumahaṃ śaktā hṛdayaṃ dūyatīva mekaṃ nu jahyāmahaṃ putraṃ kamādāya vrajāmyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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