महाभारत 1.222.3
संशयो ह्यग्निरागच्छेद्दृष्टं वायोर्निवर्तनम्मृत्युर्नो बिलवासिभ्यो भवेन्मातरसंशयम्
saṃśayo hyagnirāgaccheddṛṣṭaṃ vāyornivartanammṛtyurno bilavāsibhyo bhavenmātarasaṃśayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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