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महाभारत 1.223.24
द्रोण उवाच · droṇa uvāca
इमे मार्जारकाः शुक्र नित्यमुद्वेजयन्ति नःएतान्कुरुष्व दंष्ट्रासु हव्यवाह सबान्धवान्
ime mārjārakāḥ śukra nityamudvejayanti naḥetānkuruṣva daṃṣṭrāsu havyavāha sabāndhavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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