महाभारत 1.25.30
काञ्चनै राजतैश्चैव फलैर्वैडूर्यशाखिनःसागराम्बुपरिक्षिप्तान्भ्राजमानान्महाद्रुमान्
kāñcanai rājataiścaiva phalairvaiḍūryaśākhinaḥsāgarāmbuparikṣiptānbhrājamānānmahādrumān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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