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महाभारत 1.25.5
सूत उवाच · sūta uvāca
ततः स विप्रो निष्क्रान्तो निषादीसहितस्तदावर्धयित्वा च गरुडमिष्टं देशं जगाम ह
tataḥ sa vipro niṣkrānto niṣādīsahitastadāvardhayitvā ca garuḍamiṣṭaṃ deśaṃ jagāma ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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