महाभारत 1.26.9भेत्तारं गिरिशृङ्गाणां नदीजलविशोषणम्लोकसंलोडनं घोरं कृतान्तसमदर्शनम्bhettāraṃ giriśṛṅgāṇāṃ nadījalaviśoṣaṇamlokasaṃloḍanaṃ ghoraṃ kṛtāntasamadarśanamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें