महाभारत 1.27.29
एकः सर्वपतत्रीणामिन्द्रत्वं कारयिष्यतिलोकसंभावितो वीरः कामवीर्यो विहंगमः
ekaḥ sarvapatatrīṇāmindratvaṃ kārayiṣyatilokasaṃbhāvito vīraḥ kāmavīryo vihaṃgamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें