महाभारत 1.27.30
शतक्रतुमथोवाच प्रीयमाणः प्रजापतिःत्वत्सहायौ खगावेतौ भ्रातरौ ते भविष्यतः
śatakratumathovāca prīyamāṇaḥ prajāpatiḥtvatsahāyau khagāvetau bhrātarau te bhaviṣyataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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