महाभारत 1.27.5
यजतः पुत्रकामस्य कश्यपस्य प्रजापतेःसाहाय्यमृषयो देवा गन्धर्वाश्च ददुः किल
yajataḥ putrakāmasya kaśyapasya prajāpateḥsāhāyyamṛṣayo devā gandharvāśca daduḥ kila
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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