Loading
महाभारत 1.28.22
तान्कृत्वा पतगश्रेष्ठः सर्वानुत्क्रान्तजीवितान्अतिक्रान्तोऽमृतस्यार्थे सर्वतोऽग्निमपश्यत
tānkṛtvā patagaśreṣṭhaḥ sarvānutkrāntajīvitānatikrānto'mṛtasyārthe sarvato'gnimapaśyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें