महाभारत 1.28.6तेनावकीर्णा रजसा देवा मोहमुपागमन्न चैनं ददृशुश्छन्ना रजसामृतरक्षिणःtenāvakīrṇā rajasā devā mohamupāgamanna cainaṃ dadṛśuśchannā rajasāmṛtarakṣiṇaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें