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महाभारत 1.3.169
पुरुषश्चापि मया दृष्टःस पुनः कः
puruṣaścāpi mayā dṛṣṭaḥsa punaḥ kaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंपुरुषश्चापि मया दृष्टःस पुनः कः
puruṣaścāpi mayā dṛṣṭaḥsa punaḥ kaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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