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महाभारत 1.3.32
अथापरः शिष्यस्तस्यैवायोदस्य धौम्यस्योपमन्युर्नाम
athāparaḥ śiṣyastasyaivāyodasya dhaumyasyopamanyurnāma
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअथापरः शिष्यस्तस्यैवायोदस्य धौम्यस्योपमन्युर्नाम
athāparaḥ śiṣyastasyaivāyodasya dhaumyasyopamanyurnāma
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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