महाभारत 1.30.12
ईशोऽहमपि सर्वस्य करिष्यामि तु तेऽर्थिताम्भवेयुर्भुजगाः शक्र मम भक्ष्या महाबलाः
īśo'hamapi sarvasya kariṣyāmi tu te'rthitāmbhaveyurbhujagāḥ śakra mama bhakṣyā mahābalāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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