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महाभारत 1.30.6
सूत उवाच · sūta uvāca
इत्युक्तवचनं वीरं किरीटी श्रीमतां वरःआह शौनक देवेन्द्रः सर्वभूतहितः प्रभुः
ityuktavacanaṃ vīraṃ kirīṭī śrīmatāṃ varaḥāha śaunaka devendraḥ sarvabhūtahitaḥ prabhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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