महाभारत 1.33.8
अपि मन्त्रयमाणा हि हेतुं पश्याम मोक्षणेयथा नष्टं पुरा देवा गूढमग्निं गुहागतम्
api mantrayamāṇā hi hetuṃ paśyāma mokṣaṇeyathā naṣṭaṃ purā devā gūḍhamagniṃ guhāgatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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