महाभारत 1.35.11
यदेलापत्रेण वचस्तदोक्तं भुजगेन हपन्नगानां हितं देवास्तत्तथा न तदन्यथा
yadelāpatreṇa vacastadoktaṃ bhujagena hapannagānāṃ hitaṃ devāstattathā na tadanyathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें