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महाभारत 1.35.12
सूत उवाच · sūta uvāca
एतच्छ्रुत्वा स नागेन्द्रः पितामहवचस्तदासर्पान्बहूञ्जरत्कारौ नित्ययुक्तान्समादधत्
etacchrutvā sa nāgendraḥ pitāmahavacastadāsarpānbahūñjaratkārau nityayuktānsamādadhat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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