महाभारत 1.35.9
तत्करोत्वेष नागेन्द्रः प्राप्तकालं वचस्तथाविनशिष्यन्ति ये पापा न तु ये धर्मचारिणः
tatkarotveṣa nāgendraḥ prāptakālaṃ vacastathāvinaśiṣyanti ye pāpā na tu ye dharmacāriṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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