महाभारत 1.36.19
धनुष्कोट्या समुत्क्षिप्य स चैनं समुदैक्षतन च किंचिदुवाचैनं शुभं वा यदि वाशुभम्
dhanuṣkoṭyā samutkṣipya sa cainaṃ samudaikṣatana ca kiṃciduvācainaṃ śubhaṃ vā yadi vāśubham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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