महाभारत 1.38.38
तक्षक उवाच · takṣaka uvāca
अहं स तक्षको ब्रह्मंस्तं धक्ष्यामि महीपतिम्निवर्तस्व न शक्तस्त्वं मया दष्टं चिकित्सितुम्
ahaṃ sa takṣako brahmaṃstaṃ dhakṣyāmi mahīpatimnivartasva na śaktastvaṃ mayā daṣṭaṃ cikitsitum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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