महाभारत 1.39.12
विप्रेन्द्र यद्विषं हन्या मम वा मद्विधस्य वाकं त्वमर्थमभिप्रेप्सुर्यासि तत्र तपोधन
viprendra yadviṣaṃ hanyā mama vā madvidhasya vākaṃ tvamarthamabhiprepsuryāsi tatra tapodhana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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