महाभारत 1.39.14
विप्रशापाभिभूते च क्षीणायुषि नराधिपेघटमानस्य ते विप्र सिद्धिः संशयिता भवेत्
vipraśāpābhibhūte ca kṣīṇāyuṣi narādhipeghaṭamānasya te vipra siddhiḥ saṃśayitā bhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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