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महाभारत 1.39.1
तक्षक उवाच · takṣaka uvāca
दष्टं यदि मयेह त्वं शक्तः किंचिच्चिकित्सितुम्ततो वृक्षं मया दष्टमिमं जीवय काश्यप
daṣṭaṃ yadi mayeha tvaṃ śaktaḥ kiṃciccikitsitumtato vṛkṣaṃ mayā daṣṭamimaṃ jīvaya kāśyapa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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