महाभारत 1.39.22स चिन्तयामास तदा मायायोगेन पार्थिवःमया वञ्चयितव्योऽसौ क उपायो भवेदितिsa cintayāmāsa tadā māyāyogena pārthivaḥmayā vañcayitavyo'sau ka upāyo bhaveditiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें