महाभारत 1.39.27गतेषु तेषु नागेषु तापसच्छद्मरूपिषुअमात्यान्सुहृदश्चैव प्रोवाच स नराधिपःgateṣu teṣu nāgeṣu tāpasacchadmarūpiṣuamātyānsuhṛdaścaiva provāca sa narādhipaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें