महाभारत 1.39.28भक्षयन्तु भवन्तो वै स्वादूनीमानि सर्वशःतापसैरुपनीतानि फलानि सहिता मयाbhakṣayantu bhavanto vai svādūnīmāni sarvaśaḥtāpasairupanītāni phalāni sahitā mayāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें