महाभारत 1.39.30
स तं गृह्य नृपश्रेष्ठः सचिवानिदमब्रवीत्अस्तमभ्येति सविता विषादद्य न मे भयम्
sa taṃ gṛhya nṛpaśreṣṭhaḥ sacivānidamabravītastamabhyeti savitā viṣādadya na me bhayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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