महाभारत 1.39.31
सत्यवागस्तु स मुनिः कृमिको मां दशत्वयम्तक्षको नाम भूत्वा वै तथा परिहृतं भवेत्
satyavāgastu sa muniḥ kṛmiko māṃ daśatvayamtakṣako nāma bhūtvā vai tathā parihṛtaṃ bhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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