महाभारत 1.39.33
हसन्नेव च भोगेन तक्षकेणाभिवेष्टितःतस्मात्फलाद्विनिष्क्रम्य यत्तद्राज्ञे निवेदितम्
hasanneva ca bhogena takṣakeṇābhiveṣṭitaḥtasmātphalādviniṣkramya yattadrājñe niveditam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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