महाभारत 1.39.4
सूत उवाच · sūta uvāca
एवमुक्तः स नागेन्द्रः काश्यपेन महात्मनाअदशद्वृक्षमभ्येत्य न्यग्रोधं पन्नगोत्तमः
evamuktaḥ sa nāgendraḥ kāśyapena mahātmanāadaśadvṛkṣamabhyetya nyagrodhaṃ pannagottamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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