महाभारत 1.39.5स वृक्षस्तेन दष्टः सन्सद्य एव महाद्युतेआशीविषविषोपेतः प्रजज्वाल समन्ततःsa vṛkṣastena daṣṭaḥ sansadya eva mahādyuteāśīviṣaviṣopetaḥ prajajvāla samantataḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें