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महाभारत 1.39.6
तं दग्ध्वा स नगं नागः काश्यपं पुनरब्रवीत्कुरु यत्नं द्विजश्रेष्ठ जीवयैनं वनस्पतिम्
taṃ dagdhvā sa nagaṃ nāgaḥ kāśyapaṃ punarabravītkuru yatnaṃ dvijaśreṣṭha jīvayainaṃ vanaspatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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