महाभारत 1.39.7
भस्मीभूतं ततो वृक्षं पन्नगेन्द्रस्य तेजसाभस्म सर्वं समाहृत्य काश्यपो वाक्यमब्रवीत्
bhasmībhūtaṃ tato vṛkṣaṃ pannagendrasya tejasābhasma sarvaṃ samāhṛtya kāśyapo vākyamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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