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महाभारत 1.40.6
नृपं शिशुं तस्य सुतं प्रचक्रिरे; समेत्य सर्वे पुरवासिनो जनाःनृपं यमाहुस्तममित्रघातिनं; कुरुप्रवीरं जनमेजयं जनाः
nṛpaṃ śiśuṃ tasya sutaṃ pracakrire; sametya sarve puravāsino janāḥnṛpaṃ yamāhustamamitraghātinaṃ; kurupravīraṃ janamejayaṃ janāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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