महाभारत 1.41.11अथ वापि समग्रेण तरन्तु तपसा ममभवन्तः सर्व एवास्मात्काममेवं विधीयताम्atha vāpi samagreṇa tarantu tapasā mamabhavantaḥ sarva evāsmātkāmamevaṃ vidhīyatāmइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें