महाभारत 1.41.13
अस्ति नस्तात तपसः फलं प्रवदतां वरसंतानप्रक्षयाद्ब्रह्मन्पतामो निरयेऽशुचौ
asti nastāta tapasaḥ phalaṃ pravadatāṃ varasaṃtānaprakṣayādbrahmanpatāmo niraye'śucau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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