Loading
महाभारत 1.41.29
स तात दृष्ट्वा ब्रूयास्त्वं जरत्कारुं तपस्विनम्यथादृष्टमिदं चास्मै त्वयाख्येयमशेषतः
sa tāta dṛṣṭvā brūyāstvaṃ jaratkāruṃ tapasvinamyathādṛṣṭamidaṃ cāsmai tvayākhyeyamaśeṣataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें