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महाभारत 1.41.30
यथा दारान्प्रकुर्यात्स पुत्रांश्चोत्पादयेद्यथातथा ब्रह्मंस्त्वया वाच्यः सोऽस्माकं नाथवत्तया
yathā dārānprakuryātsa putrāṃścotpādayedyathātathā brahmaṃstvayā vācyaḥ so'smākaṃ nāthavattayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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