महाभारत 1.41.7
वीरणस्तम्बके मूलं यदप्येकमिह स्थितम्तदप्ययं शनैराखुरादत्ते दशनैः शितैः
vīraṇastambake mūlaṃ yadapyekamiha sthitamtadapyayaṃ śanairākhurādatte daśanaiḥ śitaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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