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महाभारत 1.44.13
इत्युक्त्वा हि स मां भ्रातर्गतो भर्ता तपोवनम्तस्माद्व्येतु परं दुःखं तवेदं मनसि स्थितम्
ityuktvā hi sa māṃ bhrātargato bhartā tapovanamtasmādvyetu paraṃ duḥkhaṃ tavedaṃ manasi sthitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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