महाभारत 1.44.4
स सर्पसत्रात्किल नो मोक्षयिष्यति वीर्यवान्एवं पितामहः पूर्वमुक्तवान्मां सुरैः सह
sa sarpasatrātkila no mokṣayiṣyati vīryavānevaṃ pitāmahaḥ pūrvamuktavānmāṃ suraiḥ saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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