महाभारत 1.45.13परिक्षीणेषु कुरुषु उत्तरायामजायतपरिक्षिदभवत्तेन सौभद्रस्यात्मजो बलीparikṣīṇeṣu kuruṣu uttarāyāmajāyataparikṣidabhavattena saubhadrasyātmajo balīइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें