महाभारत 1.46.39
स तु वारितवान्मोहात्काश्यपं द्विजसत्तमम्संजिजीवयिषुं प्राप्तं राजानमपराजितम्
sa tu vāritavānmohātkāśyapaṃ dvijasattamamsaṃjijīvayiṣuṃ prāptaṃ rājānamaparājitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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