महाभारत 1.46.40
महानतिक्रमो ह्येष तक्षकस्य दुरात्मनःद्विजस्य योऽददद्द्रव्यं मा नृपं जीवयेदिति
mahānatikramo hyeṣa takṣakasya durātmanaḥdvijasya yo'dadaddravyaṃ mā nṛpaṃ jīvayediti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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