महाभारत 1.48.7
सदस्यश्चाभवद्व्यासः पुत्रशिष्यसहायवान्उद्दालकः शमठकः श्वेतकेतुश्च पञ्चमः
sadasyaścābhavadvyāsaḥ putraśiṣyasahāyavānuddālakaḥ śamaṭhakaḥ śvetaketuśca pañcamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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